Snehali and Neerav, Part 11 – Time for confusion

Neerav and Snehali attend their friend Manas's wedding party and Neerav is worried about his own parents if they will be ready for his marriage with Snehali.

फिर वही गलियाँ

फिर चले आए उन्ही गलियों में जहाँ से कभी रोज़ गुज़रते थे । वक़्त बहुत बीत चला, वो गलियाँ कुछ बदल सी गयी हैं । ना आने की क़सम ले कर चल पड़े थे यहाँ से ये क़दम । आज आँखों के कोनों से आँसू वहीं बिखरने को बेताब हैं । जाने क्या थी बात …

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Wo Chanchal pal

जानते थे उन पलों के भाग जाने की फ़ितरत थी , फिर भी पकड़ने की बहुत कोशिश करी हमने । हाथ तो आयीं कुछ यादें , पर वो समय फिर बाज़ी मार ही गया ।